दिल के किसी न किसी कोने में भड़ास जरूर तिलमिला रही होगी। भड़ास की आग जरूर निकालिए, ताकि जलने वाले बच न पाएं। sarviind@gmail.com परभेजें।

Friday, December 11, 2009

स्कूटर की विदाई

कुछ दशक पहले देश के मध्यमवर्गीय घरों में स्कूटर की शान निराली हुआ करती थी। लाइसेंस-कोटा राज और औद्योगिक प्रगति की शुरुआत के उस दौर में वह सालों कतार में लगने के बाद मिलता था और परिवारों को आधुनिक होने का एहसास व पूरे महीने का सौदा-सुलुफ लाने की सुविधा देता था। वही स्कूटर इतना अप्रासांगिक हो चुका है कि उसे बनाने वाली प्रमुख कंपनी बजाज ने अगले वित्त वर्ष से उत्पादन बंद करने की घोषणा की है। स्कूटर की विदाई से भावुक होने की बजाय यह देखना ज्यादा सुखद है कि अब तरह-तरह की कारों और बाइक ने देश के लोगों को नई सुविधा, नई पहचान दी है।

1 comments:

Anonymous said...

good artical