दिल के किसी न किसी कोने में भड़ास जरूर तिलमिला रही होगी। भड़ास की आग जरूर निकालिए, ताकि जलने वाले बच न पाएं। sarviind@gmail.com परभेजें।

Saturday, January 16, 2010

मेरी धरती पर जन्म लेगी ब्रह्मोस मिसाइल


अरविन्द शर्मा
शेखावाटी में पिछले अर्से से शोध, प्राकृतिक चिकित्सा एवं ग्रामीण पर्यटन के लिए जो माहौल बना है, उससे काफी कुछ करने की गुंजाइशों को पंख लग गए हैं। इससे एक बात तो तय हो गई है कि अब घरेलु पर्यटक शेखावाटी के धार्मिक स्थलों पर जात-जड़ूले और विदेशी पर्यटक ओपन आर्ट गैलरी के रूप विलास को देखने ही ही नहीं आ रहे हैं, बल्कि इन सबसे अलग भी यहां बहुत कुछ ऐसा है, जो दुनियाभार को आकर्षित कर रहा है। इसकी वजह यहां की कुछ खासियतें हैं, जो कि इस क्षेत्र की अलग पहचान और प्रतिष्ठा बना रही हंै।
इसी कड़ी में जो नाम शामिल हुआ है, वह वाकिये सोचने पर मजबूर नहीं करता है, बल्कि दुश्मनों के दांत भी खट्टे कर सकता है। देश को एक लाख से अधिक सैनिक दे चुके शेखावाटी की धरा पर अब ब्रह्मोस मिसाइल भी बनाई जाएगी। इसके लिए झुंझुनूं जिले के पिलानी के पास स्थित श्योसिंहपुरा, पीपली व डूलानिया में ब्रह्मोस मिसाइल प्रोडेक्शन सेंटर बनाने की कवायद शुरू हो चुकी है। जिसकी मिट्टी के कण-कण में देशभक्ति का जज्बा खून बनकर दौड़ता हो, सोचो ब्रह्मोस मिसाइल की एक बारगी तो अपने को धन्य ही मानेगी, क्योंकि यहां की मिट्टी पर उसका जन्म जो होने जा रहा है। राजस्थान सरकार ने रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन को सुपसोनिक क्रूज मिसाइल ब्रह्मोस बनाने का कारखाना स्थापित करने के लिए 80 हैक्टेयर जमीन देने की मंजूरी दे दी है। डीआरडीओ की मानें तो दो साल में यहां मिसाइलों का उत्पादन भी शुरू हो जाएगा। यह कितनी बड़ी खुशी है, खुद पूर्व सैनिक भूराराम की जुबानी सुन लीजिए। कहते हैं, उन्होंने भी सेना में रहकर देश सेवा की है तथा अब उनके गांव में ही ब्रह्मोस मिसाइल का निर्माण उनके लिए सुखद पल है।

अमित जी, यह ऑरो 'पा' भी नहीं बोल पाता


अरविन्द शर्मा
आपने अमिताभ बच्चन की हालिया रीलिज 'पाÓ जरूरी देखी होगी और अमितजी के किरदार के कायल भी आप हो गए होंगे। लेकिन हकीकत का ऑरो 'पा' भी नहीं बोल पाता है। और यहां हकीकत में इस ऑरो का नाम अमित है। यह ऑरो न तो चल पा रहा है और न ही ठीक से बैठ पा रहा है। यहां तक की अब वह 'पा' भी नहीं बोल पाता है। चार वर्षीय अमित जयपुर के एक अस्पताल में दस दिन भर्ती रहकर घर लौट आया है। झुंझुनूं जिले से करीब 17 किमी पर बसे शिशियां गांव से आगे कच्चे रास्ते पर एक ढाणी में अमित का घर है। अमित प्रोजेरिया नामक बीमारी से पीडि़त है। अमित के मम्मी-पापा, दादी-दादा भावानात्मक दर्द को दिन-रात जी रहे हैं। उसके घरवालों ने तो अभी यह फिल्म देखी भी नहीं है। मासूम दुबली काया अब उसके बड़े सिर के बोझ को झेल नहीं पाती, उसके शरीर के आधे हिस्से में पेरेलाइसिस भी हो गया है। उसके बिना सहारे दिए सीधे बैठा भी नहीं जाता। फिर भी इस मासूम के दर्द सहने की ताकत गजब है।
बहुत तकलीफ में है असली ऑरो
अमित पूरे घर का चहेता है, यहां तक कि बच्चों का भी। 15 दिन पहले तक वह खूब खेलता था, मस्ती-शैतानी भी करता था, कुछ भी खा-पी लेता। आने-जाने वालों को राम-राम और टाटा भी करता था। याददाश्त भी खूब तेज, अंग्रेजी में बॉडी पाटर््स के नाम भी याद हैं। सैना से रिटायर अमित के बुजुर्ग दादा शिशपाल और पापा राजपाल ने ऐसा कोई डॉक्टर नहीं छोड़ा, जहां उसके ठीक होने की उम्मीद थी। दादी परमेश्वरी और मां अनिता ने कोई मंदिर-देवला नहीं छोड़ा, पर मन्नत फली नहीं। घरवाले बताते हैं कि जब यह डेढ़ साल का था, तभी सये वह ऑरो जैसा दिखने लगा था। दस महीने का हुआ तो सारे बाल उड़ गए और सिर पर नसें साफ उभरती दिखने लगीं। हाथ-पैर बिल्कुल लकड़ी जैसे दुबले होते गए, जिससे सिर का आकार बड़ा होने लगा।
आप चाहते हैं मदद करना
अगर आप अमित की मदद करना चाहते हैं तो 'आपकी खबरÓ ब्लॉग की मुहिम में जुट जाइए। अमित के दादा शिशपाल चौधरी से मोबाइल नंबर 09667288725 के जरिए संपर्क कर सकते हैं या हमें ईमेल करें और कमेंट करें।