मैं बेरोजगार हूं! सीरिज-9
अभी हमारी सीरिज चल रही है और सकारात्मक परिणाम सामने आने लगे हैं. आरपीएससी की आरएएस-मुख्य परीक्षा-2018 के रिजल्ट पर लगी हाईकोर्ट की रोक भी हट गई है. अब रिजल्ट जारी हो जाएगा. जेईएन भर्ती का सिलेबस भी जल्द जारी होने वाला है.
एक शब्द है क्रूर. इसे अंग्रेजी में Cruel कहते हैं. हिंदी में इसके मायने ढूंढे तो पता चला कि निर्दयी, कठोरहृदय, दयाहीन, कठोर होते हैं. यह सरकार के लिए पर्याप्त शब्द है. सरकारी नौकरी के सपने (सरकारी मजाक) के समझने की कोशिश करते हैं.
इन शब्दों की बात मैं क्यों कर रहा हूं. एक बेरोजगार मोहन सिंह ने मुझे दर्द लिखकर भेजा है. जिसे हूबहू सरकार को पहुंचा रहा हूं.
निर्दयी : सोचिए-कोई आपको नौकरी का सपना दिखाए और फिर आपसे वो छिन ले तो कितनी तकलीफ होगी. ऊर्जा विभाग में नौ हजार पदों की भर्ती का सपना दिखाकर ऐसा ही किया गया. एक साल हो गए घोषणा को, लेकिन अभी तक नोटिफिकेशन तक जारी नहीं हुआ. जबकि विभाग में 17 हजार से ज्यादा पद खाली पड़े हैं. ठेके पर लोगों को रखकर काम कराया जा रहा है. युवा ट्विटर पर ऊर्जा मंत्री को हर दिन घोषणा याद दिलाते हैं. युवा पूछते हैं कि कुछ याद नहीं आता तो बजट घोषणा के पन्ने ही देख लो, लेकिन सरकार पन्ने पलटना ही नहीं चाहती. हम अपील करते हैं कि घोषणा याद कीजिए. भर्ती कीजिए, वरना युवा चुनाव में सरकार को करंट नहीं लगा दें.
कठोर हृदय : नियुक्ति देने में दिल बड़ा रखना चाहिए, लेकिन सरकार का दिल कठोर होता जा रहा है. साल 2013 से दो हजार युवा बेरोजगार सूचना सहायक भर्ती-2013 की वेटिंग लिस्ट में अपनी नियुक्ति का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन सरकार का दिल पसीज ही नहीं रहा. आरपीएससी की एईएन मेंस-2018 का रिजल्ट अभी तक जारी नहीं किया जा रहा. अभ्यर्थी भेरुलाल मीना लिखते हैं-अरविंद जी, आप हमारी भर्ती को संज्ञान में लीजिएगा. राजस्थान अधीनस्थ सेवा चयन बोर्ड द्वारा दस्तावेज सत्यापन कराए पांच महीने बित चुके हैं, लेकिन रिजल्ट जारी नहीं हो रहा. कम्प्यूटर शिक्षक भर्ती का मामला भी अटका हुआ है. छात्र ट्विटर पर कैंपेन चलाकर थक चुके हैं. शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह डोटासरा को इस भर्ती को गंभीरता से लेना चाहिए, क्योंकि-आने वाले समय में ऑनलाइन पढ़ाई की मांग बढ़ेगी. ऐसे में ये शिक्षक बड़ी भूमिका निभा सकते हैं.
दयाहीन : कोविड-19 के दौर में पुलिस को कोरोना फायटर का नाम दिया गया. इनके काम की हर जगह सराहना हुई. पुलिस की कमी भी इस दौरान दिखी. इसके बाद भी सरकार को दया नहीं आ रही. पुलिस भर्ती-2018 के रिक्त पद नहीं भरे जा रहे. युवा हर दिन ट्विटर पर सरकार को लिखते हैं, लेकिन सरकार दयाहीन हो चुकी है. 1600+ पदों को भरा जाए तो पुलिस की कमी को काफी हद तक पूरा किया जा सकता है. एलडीसी के विभिन्न मुद्दों पर भी सरकार की चुप्पी खलती है.
कठोर : एएनएम-जीएनम-2013 की नियुक्ति का मामला भी अभी सुलझा नहीं है. सरकार की कठोरता देखिए कि सात साल में भी भर्ती पूरी नहीं की जाती. सरकार भर्ती पूरा करने का वादा करके मिठाई खा लेती है, लेकिन उस मिठाई का कर्ज नहीं चुकाती. हैरानी यह है कि नकम का हक तो चुकाना ही चाहिए. इन युवाओं ने वोट के तौर पर बड़ा अहसान किया था, लेकिन सरकार सत्ता में आकर इसे भूल गई. प्रयोगशाला सहायक शिक्षा भर्ती की नियुक्ति की भी नहीं हुई है. छात्र सवाल उठा रहे हैं कि रीट-2020 के लिए संवेदनशीलता कब आएगी. ट्विटर पर छात्र बन्ने सिंह ने लिखा-सैकंड ग्रेड-2013 शिक्षक भर्ती के चयनित अभ्यर्थियों के साथ अन्याय हुआ है. पहले तो सरकार ने सैकंड ग्रेड के मामले को फर्स्ट ग्रेड के साथ जोड़ दिया, फिर शिक्षा विभाग के लीगल डिपार्टमेंट ने फाइल पर नकारात्मक टिप्पणी कर दी. अध्यापक भर्ती-2006 व अध्यापक भर्ती-2012 के प्रकरण भी कोर्ट में लंबित चल रहे हैं.
असल में, बेरोजगारों के दर्द की कहानियां इतनी लंबी है कि आज पूरी नहीं हो सकती. शेष कहानियां रविवार के अंक में. सरकार को सोचना तो होगा कि बेरोजगारों के साथ मजाक कब तक करती रहेगी. वह यह क्यों भूल जाती है कि अगर इन युवाओं ने चुनाव में मजाक करना शुरू कर दिया तो क्या होगा.
अभी हमारी सीरिज चल रही है और सकारात्मक परिणाम सामने आने लगे हैं. आरपीएससी की आरएएस-मुख्य परीक्षा-2018 के रिजल्ट पर लगी हाईकोर्ट की रोक भी हट गई है. अब रिजल्ट जारी हो जाएगा. जेईएन भर्ती का सिलेबस भी जल्द जारी होने वाला है.
एक शब्द है क्रूर. इसे अंग्रेजी में Cruel कहते हैं. हिंदी में इसके मायने ढूंढे तो पता चला कि निर्दयी, कठोरहृदय, दयाहीन, कठोर होते हैं. यह सरकार के लिए पर्याप्त शब्द है. सरकारी नौकरी के सपने (सरकारी मजाक) के समझने की कोशिश करते हैं.
इन शब्दों की बात मैं क्यों कर रहा हूं. एक बेरोजगार मोहन सिंह ने मुझे दर्द लिखकर भेजा है. जिसे हूबहू सरकार को पहुंचा रहा हूं.
नमस्कार सर मेरा नाम मोहन सिंह है और मैं एलडीसी भर्ती 2018 का प्रताड़ित विद्यार्थी हूं. मैं आपके माध्यम से सरकार को कहना चाहता हूं कि सरकार हमें अपनी नियत साफ करें. हमारे एलडीसी के 587 पद जोड़े जाएंगे या नहीं. अगर यह सरकार हमें रोजगार नहीं दे रही है. मैं पिछले 3 महीने से मानसिक रूप से तनाव में हूं. कभी-कभी तो मुझे लगता है कि मुझे खुद को समाप्त कर लेना चाहिए. इस जिंदगी को पर मेरे एक छोटा बच्चा है. मेरी निगाहें उस पर जाती है तो फिर मुझे यह कदम उठाने से रोकना पड़ता है. अपने आप को अब आप ही बताओ हम क्या करें. सरकार हमें यह बताएं की आपकी सीट्स नही जुड़ेगी तो हम कहीं बेलदारी या मजदूरी करके अपने परिवार की स्थिति को सुधारें. अब और कितना वेट करें सर आप ही बताओ. आप हमारा मैसेज एक बार सरकार तक पहुंचा दीजिए.हम मोहन सिंह जैसे युवाओं से कहना चाहते हैं कि वे कोई गलत कदम नहीं उठाए. उन्हें हताश होने की जरूरत नहीं है. वे अपनी लड़ाई जारी रखे. सरकार को उन्हें सुनना ही होगा. अब बात कठोर हो चुकी सरकार की.
निर्दयी : सोचिए-कोई आपको नौकरी का सपना दिखाए और फिर आपसे वो छिन ले तो कितनी तकलीफ होगी. ऊर्जा विभाग में नौ हजार पदों की भर्ती का सपना दिखाकर ऐसा ही किया गया. एक साल हो गए घोषणा को, लेकिन अभी तक नोटिफिकेशन तक जारी नहीं हुआ. जबकि विभाग में 17 हजार से ज्यादा पद खाली पड़े हैं. ठेके पर लोगों को रखकर काम कराया जा रहा है. युवा ट्विटर पर ऊर्जा मंत्री को हर दिन घोषणा याद दिलाते हैं. युवा पूछते हैं कि कुछ याद नहीं आता तो बजट घोषणा के पन्ने ही देख लो, लेकिन सरकार पन्ने पलटना ही नहीं चाहती. हम अपील करते हैं कि घोषणा याद कीजिए. भर्ती कीजिए, वरना युवा चुनाव में सरकार को करंट नहीं लगा दें.
कठोर हृदय : नियुक्ति देने में दिल बड़ा रखना चाहिए, लेकिन सरकार का दिल कठोर होता जा रहा है. साल 2013 से दो हजार युवा बेरोजगार सूचना सहायक भर्ती-2013 की वेटिंग लिस्ट में अपनी नियुक्ति का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन सरकार का दिल पसीज ही नहीं रहा. आरपीएससी की एईएन मेंस-2018 का रिजल्ट अभी तक जारी नहीं किया जा रहा. अभ्यर्थी भेरुलाल मीना लिखते हैं-अरविंद जी, आप हमारी भर्ती को संज्ञान में लीजिएगा. राजस्थान अधीनस्थ सेवा चयन बोर्ड द्वारा दस्तावेज सत्यापन कराए पांच महीने बित चुके हैं, लेकिन रिजल्ट जारी नहीं हो रहा. कम्प्यूटर शिक्षक भर्ती का मामला भी अटका हुआ है. छात्र ट्विटर पर कैंपेन चलाकर थक चुके हैं. शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह डोटासरा को इस भर्ती को गंभीरता से लेना चाहिए, क्योंकि-आने वाले समय में ऑनलाइन पढ़ाई की मांग बढ़ेगी. ऐसे में ये शिक्षक बड़ी भूमिका निभा सकते हैं.
दयाहीन : कोविड-19 के दौर में पुलिस को कोरोना फायटर का नाम दिया गया. इनके काम की हर जगह सराहना हुई. पुलिस की कमी भी इस दौरान दिखी. इसके बाद भी सरकार को दया नहीं आ रही. पुलिस भर्ती-2018 के रिक्त पद नहीं भरे जा रहे. युवा हर दिन ट्विटर पर सरकार को लिखते हैं, लेकिन सरकार दयाहीन हो चुकी है. 1600+ पदों को भरा जाए तो पुलिस की कमी को काफी हद तक पूरा किया जा सकता है. एलडीसी के विभिन्न मुद्दों पर भी सरकार की चुप्पी खलती है.
कठोर : एएनएम-जीएनम-2013 की नियुक्ति का मामला भी अभी सुलझा नहीं है. सरकार की कठोरता देखिए कि सात साल में भी भर्ती पूरी नहीं की जाती. सरकार भर्ती पूरा करने का वादा करके मिठाई खा लेती है, लेकिन उस मिठाई का कर्ज नहीं चुकाती. हैरानी यह है कि नकम का हक तो चुकाना ही चाहिए. इन युवाओं ने वोट के तौर पर बड़ा अहसान किया था, लेकिन सरकार सत्ता में आकर इसे भूल गई. प्रयोगशाला सहायक शिक्षा भर्ती की नियुक्ति की भी नहीं हुई है. छात्र सवाल उठा रहे हैं कि रीट-2020 के लिए संवेदनशीलता कब आएगी. ट्विटर पर छात्र बन्ने सिंह ने लिखा-सैकंड ग्रेड-2013 शिक्षक भर्ती के चयनित अभ्यर्थियों के साथ अन्याय हुआ है. पहले तो सरकार ने सैकंड ग्रेड के मामले को फर्स्ट ग्रेड के साथ जोड़ दिया, फिर शिक्षा विभाग के लीगल डिपार्टमेंट ने फाइल पर नकारात्मक टिप्पणी कर दी. अध्यापक भर्ती-2006 व अध्यापक भर्ती-2012 के प्रकरण भी कोर्ट में लंबित चल रहे हैं.
असल में, बेरोजगारों के दर्द की कहानियां इतनी लंबी है कि आज पूरी नहीं हो सकती. शेष कहानियां रविवार के अंक में. सरकार को सोचना तो होगा कि बेरोजगारों के साथ मजाक कब तक करती रहेगी. वह यह क्यों भूल जाती है कि अगर इन युवाओं ने चुनाव में मजाक करना शुरू कर दिया तो क्या होगा.
0 Comments