बेरोजगारों के दर्द की कहानियां : एसबीआई रिजल्ट घोषित नहीं कर रहा, गुजरात में बेरोजगारों की कोई सुन नहीं रहा, उत्तरप्रदेश में बीपीएड भर्ती फंसी है, एसएससी युवा गुस्से में है और राजस्थान के युवा सरकार बनने-गिरने का इंतजार करें

मैं बेरोजगार हूं सरकार-सीरिज-15

यह देश ही बेरोजगारों का देश बनता जा रहा है. युवाओं के दर्द की कहानियां लंबी होती जा रही है. सरकारें ही मजाक नहीं कर रही. बैंक भी युवाओं के भविष्य के साथ खेल रही है. एसबीआई के उम्मीदवार परेशान हैं. उनका रिजल्ट नहीं आ रहा. वे ट्वीटर पर कैंपेन चलाने को मजबूर हैं. उन्होंने #declareSBIApreResult2020 कैंपेन के जरिए अपनी आवाज उठाई, लेकिन उनकी सुनने वाला कौन है. यहां कोई सुनने वाला नहीं. बैंक उपभोक्ताओं की परेशानी ही नहीं सुनते. युवाओं की क्यों सुनेंगे. मंत्री निर्मला सीतारमण को इस मामले में हस्तक्षेप करना चाहिए.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के गुजरात के हाल भी बूरे हैं. यहां भी #LRD_MALE का मुद्दा ट्विटर पर ट्रेंड करता है. 18 हजार से ज्यादा नौकरी मांगते हैं, लेकिन इन बेरोजगारों के दर्द की कहानी मीडिया में सुर्खियां नहीं बनती.
रेल मंत्री पीयूष गोयल का रेलवे विभाग भी पटरी से पूरी तरह उतर चुका है. हजारों चयनित उम्मीदवारों को नियुक्ति नहीं दी जा रही.
अब चलते हैं उत्तरप्रदेश. यहां बीपीएड भर्ती का विवाद सड़कों पर आया हुआ है. लेकिन, सुनने वाला कौन है. यहां मुख्यमंत्री को युवाओं की फिक्र दिख नहीं रही.
बात एसएससी की भी कर लेते हैं. यूएफएम केस में अब छात्रों को यूएफएम शब्द ही गुस्सा आने लगा है. एसएससी के छात्र हर दिन ट्वीटर सरकार को कोसते हैं. लिखते हैं. न्याय मांगते हैं. लेकिन एसएससी और केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह सुनने को ही तैयार नहीं है. एसएससी तर्क दे रही है कि जांच के लिए बनाई गई कमेटी ने जांच रिपोर्ट सौंपती है. अब सवाल यह है कि जांच रिपोर्ट मिल गई है तो वह कब तक सार्वजनिक होगी. क्यों इस मामले को इतना लंबा खिंचा जा रहा है. आरटीआई में एसएससी जवाब देती है कि उन्हें कमेटी की रिपोर्ट मिल गई है. हैरानी यह है कि एसएससी के छात्रों की नींद पूरी तरह उड़ी हुई है. उन्हें समझ नहीं आ रहा कि फैसला क्या आएगा. क्या उन्हें न्याय मिलेगा. यह सरकारी फाइल हैं, जो धीरे-धीरे आगे बढ़ाई जा रही है.
राजस्थान के युवा फिलहाल नौकरी के लिए इंतजार करें. क्योंकि-यहां मुख्यमंत्री अशोक गहलोत अपनी सरकार और कुर्सी बचाने में लगे हैं. उनके पास युवाओं के दर्द के लिए अब वक्त नहीं है. एलडीसी, शिक्षक भर्ती समेत सभी भर्तियों के युवा अब ट्वीटर पर ही लगे रहे.
रीट-2020 को लेकर अब सरकार ने कहा है कि 2 सितंबर को एग्जाम नहीं होगी. इसके लिए भाजपा जिम्मेदार है. पहले कोरोना वायरस जिम्मेदार था. इसके लिए इंतजार करना होगा. एक मुफ्त की सलाह है कि रीट-2020 का इंतजार कर रहे युवा इसे िफलहाल भूल जाए. क्योंकि-सरकार बार-बार इसे लेकर बयान बदल देती है. अब देखना यह है कि बयान बदल रही सरकार ही कहीं बदल नहीं जाए. तब तक घड़ी की तरफ नजर बनाकर रखें.

अटकी भर्तियों, रिजन्ट और परीक्षा में गड़बड़ी के लिए मुझे sarviind@gmail.com पर लिख भेजें. अगली सीरिज रविवार को.

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