एसएससी का यूएफएम और छात्रों की जीत की पूरी कहानी जरूर पढ़ें, क्योंकि-यह भरोसे की जीत है!

यह लड़ाई मेरी नहीं थी. उन छात्रों की थी जिन्होंने मुझ पर भरोसा जताया था. यह लड़ाई उन छात्रों की थी, जिन्होंने एसएससी पर भरोसा किया था. यह लड़ाई उस भरोसे को फिर से जीतने की थी, जिसे केंद्र सरकार और एसएससी ने मिलकर तोड़ा. एसएससी की सीएचएसएल-2018 के टियर-2 में यूएफएम देकर 4560 छात्रों को गलत तरीके से फेल करना बिल्कुल जायज नहीं ठहराया जा सकता था. ट्विटर पर कुछ छात्रों ने जब यह मामला मुझे भेजा, मुझसे एक मिनट पर नहीं रहा गया. मैं बैचेन हो गया. गुस्से से भर गया. समझ नहीं आ रहा था कि यह कैसे हो सकता है कि पत्र लेखन के सवाल पर काल्पनिक नाम-पता लिखने पर छात्र को अच्छे अंकों के बावजूद शून्य अंक देकर फेल कर दिया जाए. एसएससी ऐसा कैसे कर सकता था. छात्रों ने भरोसा करके मुझसे संपर्क किया. छात्रों ने बताया कि कोई भी नेशनल मीडिया (अखबार व चैनल) उनके दर्द को नहीं समझ रहा. उनकी खबर के लिए किसी के पास समय नहीं है. मैंने सभी तथ्य समझने के बाद तय किया कि यह खबर दैनिक भास्कर में सबसे पहले ब्रेक करूंगा. सिर्फ खबर नहीं करूंगा, बल्कि इस मुद्दे को तब तक उठाऊंगा, जब तक न्याय नहीं मिल जाता.


दैनिक भास्कर में एसएससी के छात्रों के साथ हुए अन्याय की स्टोरी छपी तो देशभर के छात्रों ने ट्विटर और वाट्सएप पर संदेश भेजे. छात्रों के फोन आने लगे. उन्होंने उम्मीद जताई. अपना दर्द बताया कि कैसे उन्होंने सालभर तैयार की. अपने घर से दूर रहकर. उनके माता-पिता ने उन पर कैसे भरोसा जताया है. उनके सपने क्या है. किसी ने अपनी नौकरी तक छोड़ दी इस एग्जाम के लिए. यह प्यार और भरोसे की वह लिस्ट है, जिसे मैं हमेशा सहेजकर रखूंगा. पंजाब, हरियाणा, गुजरात, साउथ, दिल्ली, बिहारी और राजस्थान. देश के हर कोने से छात्रों ने उम्मीद के साथ मुझे फोन करने शुरू कर दिए. उन्हें लगने लगा कि एसएससी का चेयरमैन मैं ही हूं, जो उनकी एक मांग पर उन्हें पास कर दूंगा. यूएफएम हटा दूंगा. लेकिन, यह भरोसा मैं बिल्कुल नहीं तोड़ सकता था. एसएससी की हर गड़बड़ी को उजागर करना तय किया. ऐसी उत्तर पुस्तिकाएं भी सबसे पहले मैं ही लेकर आया, जिसमें एसएससी ने उन छात्रों को पास किया था, जिन्होंने काल्पनिक नाम-पता लिखा था. कांट-छांट कर रखी थी. भेदभाव की हर तस्वीर दिखाई. पत्र लेखन के सीबीएसई और एनसीईआरटी के नियम भी बताए. एसएससी को सुप्रीम कोर्ट की तल्ख टिप्पणियां भी याद दिलाई. छात्रों के दर्द को पत्रों के जरिए एसएससी तक पहुंचाना शुरू किया. छात्रों को भास्कर की मुहिम से एक हौंसला मिलने लगा कि उनकी सुनी जाएगी. भले ही इसमें देर हो जाए. लॉक डाउन में भी उनकी उम्मीद टूटे नहीं, यह बड़ा चैलेंज था. मुझे याद है, ट्विटर पर कैंपेन में कैसे लाखों ट्वीट होने शुरू हुए. इसके बाद पीएमओ को ईमेल और एसएससी पोर्टल पर शिकायतें. छात्रों ने कहा कि पोर्टल पर शिकायतों को सही तरीके से पढ़ा ही नहीं जाता. मैंने खुद पोर्टल पर छात्र बनकर शिकायत डालकर देखी. एसएससी की लापरवाही करीब से देखी. मुझे याद है कि एसएससी के चेयरमैन बृजराज शर्मा का जब मैंने इंटरव्यू किया तो मेरे तीखे सवालों से वे घबराए गए थे. वे सवालों को टालना चाहते थे. उन्हें पता था कि भास्कर एसएससी की हर गड़बड़ी को उजागर कर रहा है. भास्कर की खबरों को वे नकार भी नहीं पा रहे थे. इंटरव्यू में उन्होंने भरोसा दिया कि वे कमेटी बनाएंगे। अगले दिन पब्लिक नोटिस भी जारी किया, लेकिन अपनी गलती नहीं मानी. छात्रों को नियम याद दिलाए. दूसरे दिन भास्कर ही था, जिसने इस पब्लिक नोटिस का सच छात्रों को बताया. यह भी बताया कि एसएससी ने इस नोटिस में कितने झूठ बोले हैं. भास्कर की खबरें पीएमओ और एसएससी तक हर रोज पहुंच रही थी. कई सांसदों ने भास्कर की ही खबरें ट्वीट करके केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह से छात्रों के लिए न्याय मांगा. आज भी ट्विटर पर एसएससी और यूएफएम मामला सर्च किया जाएगा तो भास्कर की सीरिज ही सामने आएगी. भास्कर की खबरों के बाद ही कुछ न्यूज पोर्टल व यूट्यूब चैनल ने इस मामले को जगह दी.

हाल ही में, जब एसएससी ने यूएफएम हटाकर इन 4560 छात्रों को राहत दी है. यह संघर्ष की जीत है. यही न्याय है. इनमें से बहुत से छात्र ऐसे हैं, जो लिखते थे कि उन्हें नींद नहीं आ रही. इन छात्रों ने इस फैसले के बाद मुझे ट्विटर और वाट्सएप पर शुभकामनाएं भेजी. लड़ाई में साथ देने के लिए धन्यवाद दिया. लेकिन, मैं खुले दिल से स्वीकार करता हूं कि यह जीत मेरी नहीं है, बल्कि इन छात्रों की है. अगर यह मुझे इतना प्यार नहीं देते. इतना मुझ पर भरोसा नहीं करते तो शायद इस लड़ाई में मैं लगातार आगे नहीं बढ़ता. इन छात्रों को फिर से बधाई. शुभकामनाएं.

कई छात्र लिख रहे हैं कि एसएससी के बाकी रिजल्ट में भी यूएफएम पर राहत देनी चाहिए. मैं उन्हें यकीन दिलाता हूं कि मैं उनकी हर लड़ाई में हमेशा साथ रहूंगा. अगर एसएससी ने उनके साथ न्याय नहीं किया तो यह लड़ाई फिर लड़ेंगे.

भविष्य के लिए सभी छात्रों को शुभकामनाएं...


धन्यवाद

अरविंद शर्मा

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3 Comments

अनिल कुमार said…
इस लड़ाई के हमारा साथ देने के लिए आपका तहे दिल से शुक्रिया। आपने शुरुआत से हम छात्रों की आवाज बन कर हम पर बहुत बड़ा उपकार किया। अब हमारी उम्मीद है कि SSC जल्द से जल्द रिजल्ट भी प्रकाशित करे और आगे की प्रकिया को जल्द से जल्द पूरा करे। 2 साल से अधिक का समय निकाल चुका है।
Unknown said…
This success could not have been possible without your support Sir. Please accept my sincere gratitude 🙏.
Vikas Dhull said…
Thanks you very much sir. Now please do a story on CGLE 18 T3 RESULT which is pending from 224 days. In UFM issue most of the protesters wereCGLE 18 aspirants. We had the fear that the same rule were going to be applied in CGLE 18 T3. But now as UFM is scrapped from CHSL 18 as a one time measure this should also be scrapped from CGLE 18 T3 also. And we are waiting eagerly for the result. Please sir do a story on this issue also. Fate of the 42570 CGLE 18 aspirants is still not known. You are our hope.
Regards