दिल के किसी न किसी कोने में भड़ास जरूर तिलमिला रही होगी। भड़ास की आग जरूर निकालिए, ताकि जलने वाले बच न पाएं। sarviind@gmail.com परभेजें।

Monday, January 25, 2010

यहां ग्रामीण चलाते हैं रेलवे स्टेशन


गणतंत्र की मिसाल देखनी हो तो राजस्थान के झुंझुनूं जिले में चले आइए। यहां आप जानेंगे कि गणतंत्र का मतलब और सोचने पर मजबूर भी होंगे कि ऐसे लोग नहीं तो आज तस्वीर कैसी होती।
जयपुर से 146 किलोमीटर की दूरी पर स्थित बलवंतपुरा-चैलासी रेलवे स्टेशन पर पहुंचते ही हमारा सामना एक सुखद आश्चर्य से होता है। यह स्टेशन जन प्रयासों का बेमिसाल नमूना तो है ही, आजाद भारत का एकमात्र स्टेशन भी होगा, जिसे ग्रामीणों ने बनाया तो है ही, प्रबंधन और संचालन भी रेलवे नहीं बल्कि उन्हीं के हाथों में है।
सुनियोजित तरीके से स्टेशन की बागडोर संभाल रहे ये हाथ झुंझुनूं के पांच ग्राम पंचायतों के हैं, जो तूफानी जुनून से भारत के विकास को अपने दम पर ताकत देने में जुटे हैं। बलवंतपुरा-चैलासी स्टेशन ग्रामीणों के संकल्प व प्रतिबद्धता का प्रतीक भी है। वह इसलिए भी क्योंकि पांच साल से पांच पंचायतों के ग्रामीण बिना सरकारी मदद के सफलतापूर्वक स्टेशन का संचालन कर रहे हैं। ये लाग पूंजीपति भी नहीं हैं। इनके गांव में तो बुनियादी सुविधाएं तक नहीं हैं। स्टेशन बनने के पीछे भी बुलंद इरादों का एक पूरा संघर्ष छिपा है। दरअसल, स्टेशन की मांग 1996 से उठ रही थी। आंदोलन के बाद भी जब मांग नहीं मानी गई तो ग्रामीणों ने हताश होने केबजाय नया रास्ता खोज निकाला।
गांव के लोगों ने डेढ़ सौ लोगों से चंदा लेकर पंद्रह लाख रुपए जुटाए और स्टेशन को बनाने में जुट गए। स्टेशन बनने के बाद अब समस्या यहां ट्रेन रुकने और टिकट की थी। जयपुर से लेकर दिल्ली तक कोई अधिकारी नहीं बचा, जिसे इन लोगों ने पत्र न लिखा हो। जद्दोजहद के बाद रेलवे ट्रेन रोकने और टिकट बांटने पर तो राजी हो गया, लेकिन शर्त रखी कि स्टेशन की पूरी व्यवस्था ग्रामीण ही करेंगे। आखिरकार, 3 जनवरी, 2005 को पहली ट्रेन रुकी और ग्रामीणों का सपना सच हुआ। आज आठ ट्रेन रुकती हैं और 300 यात्री सफर करते हैं। यहां टिकट बांटने की कहानी भी बड़ी अजीब है। अगर ट्रेन जयपुर से बलवंतपुरा-चैलासी रेलवे स्टेशन आ रही है तो गार्ड सीकर से और लोहारू से आते समय मुकुंदगढ़ से टिकट लेकर आता है और बांटता है।
स्टेशन पर पूरी व्यवस्था ग्रामीणों के हाथों में है। पानी से लेकर बैठने, टिकट बांटते वक्त लोगों को एक कतार में रखने और खुल्ले पैसे तक का जुगाड़ भी यहां तैनात ग्रामीण ही करते हैं। स्टेशन की व्यवस्था देख रहे चैलासी गांव के 65 वर्षीय बजरंग जांगिड कहते हैं कि हम इस स्टेशन को पूरे देश का आदर्श रेलवे स्टेशन बना देंगे। बकौल जांगिड, रेलवे स्टेशन तो आसानी से बन गया। अब सबसे ज्यादा चुनौतीभरा काम है, स्टेशन को व्यवस्थित करना। (sabhar : lp pant)

4 comments:

Udan Tashtari said...

पढ़ जानकर अच्छा लगा!!


गणतन्त्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ!

cg4bhadas.com said...

bahut badhiya hai kiya aapka ye samchar mai hamre masik patrika me dal sakta hu sii jwab dijiye ga

सुशीला पुरी said...

adbhuta........

अरविन्द शर्मा said...

cg4bhadas.com
bilkul dal sakte hai.

arvind sharma