राहुल गांधी जी! बेरोजगारों के लिए केंद्र को जरूर कोसिए, लेकिन राजस्थान में एलडीसी के 587 पदों का हिसाब भी ले लीजिए

मैं बेरोजगार हूं सरकार-सीरिज-12
कांग्रेस के राहुल गांधी और उनके नेता हमेशा बेरोजगारी के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को कोसते रहते हैं. राजस्थान में कांग्रेस सरकार है और उनके नेता और अफसर बेरोजगारों के साथ कितना धोखा कर रहे हैं, यह किसी को नहीं दिख रहा. मुख्यमंत्री अशोक गहलोत भी चुप है. ऐसा नहीं है कि उन्हें एलडीसी भर्ती-2018 में हुए 587 पदों के घोटाले को लेकर जानकारी नहीं है. बस, उन्होंने आंखें बंद कर रखी है और क्यों कर रखी है कि यह जवाब उन्हें आने वाले दिनों में देना ही होगा. फिलहाल वे अपनी सरकार बचाने में व्यस्त है.
एलडीसी भर्ती से जुड़े छात्र हर दिन मुझे लिखते हैं. वे सरकार को लिखते-लिखते थक चुके हैं. वे उम्मीद लगाकर मुझे वाट्सएप करते हैं. ट्वीट करते हैं. उन्हें लगता है कि मैं लिख दूंगा तो सरकार मान जाएगी, लेकिन सरकार बहरी हो चुकी है. उन्हें अपनी सरकार के अफसरों द्वारा किया गया घोटाला नहीं दिख रहा.
घोटाले की स्क्रिप्ट कैसे लिखी गई, इसे समझने के लिए कुछ दस्तावेजों का रिवीजन फिर से करा देता हूं. 16 अप्रैल 2018 को राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड ने नोटिफिकेशन जारी कर 11,255 पदों के लिए भर्ती निकाली. यह भर्ती लिपिक ग्रेड-2 और जूनियर असिस्टेंट की भर्ती के लिए थी. इसमें स्टेट सेक्रेटरिएट के लिए 329 सीट, राजस्थान लोक सेवा आयोग में नौ सीट और अधीनस्थ विभागों की 10917 सीटों के लिए आवेदन मांगे गए थे. एक मार्च 2018 को पदों की संख्या बढ़ाकर 12456 कर दी गई. यह पद इसलिए बढ़ाए गए, क्योंकि-प्रशासनिक सुधार विभाग ने 1175 पदों के लिए और अभिशंषा की. 12 अगस्त से 16 सितंबर 2018 तक चार पारियों में प्री-एग्जाम हुआ. एक मार्च 2019 को नया नोटिफिकेशन जारी हुआ. इसमें पदों की संख्या बढ़ाकर 12456 कर दिया गया. सात मार्च को तीन गुना अभ्यर्थियों को टाइपिंग व एफिशिएंसी टेस्ट के लिए पास किया गया. एक आरटीआई से पता चलता है कि ओबीसी के 227 और सामान्य वर्ग के 360 पदों पर आरक्षण घोटाला किया गया.क्योंकि-नियमों के अनुसार ओबीसी को 21 और सामान्य वर्ग को 50 फीसदी आरक्षण मिलना चाहिए. जबकि आरटीआई के आंकड़े बताते हैं कि ओबीसी को 17 और सामान्य वर्ग को सिर्फ 46 फीसदी ही आरक्षण दिया गया. इसी तरह नोन-टीएसपी के 562 पदों का हिसाब भी बोर्ड ने किसी दस्तावेज के जरिए अभी तक नहीं दिया है।. इसलिए सवाल यह भी उठ रहे हैं कि ये 562 पद कहां गए. सोचिए अगर आरटीआई में आंकड़े सामने नहीं आते तो सरकार मानती ही नहीं कि गड़बड़ी हुई है. युवा हर दिन ट्वीट करते रहते हैं. मैं खुद दैनिक भास्कर में इस घोटाले को सबसे पहले उठा चुका हूं, लेकिन मुख्यमंत्री इस मामले पर चुप क्यों है.
मुख्यमंत्री की सुविधा के लिए घोटाले के आगे की कहानी भी सुना देता हूं.
टाइपिंग व एफिशिएंसी टेस्ट के 15 दिन बाद यानी 23 जून 2019 को कार्मिक विभाग ने सभी प्रक्रियाधीन भर्तियों में एमबीसी यानी मोस्ट बैकवर्ड क्लास के लिए पांच प्रतिशत आरक्षण देने के आदेश जारी कर दिए. एमबीसी में गुर्जर, गड़िया लोहार, बंजारा, रेबारी व राइका समुदायों को शामिल किया गया है. हालांकि इस कैटेगरी को एक प्रतिशत आरक्षण पहले से ही दिया जा रहा था. इसलिए एलडीसी में भी 450 पद और बढ़ गए. एलडीसी भर्ती के लिए कुल पदों की संख्या 12906 हो गई. 25 अक्टूबर 2019 को खाली सीटों के मुकाबले डेढ़ गुना अभ्यर्थियों को दस्तावेज वेरिफिकेशन के लिए बुलाया गया. इसमें 17451 गैर अनुसूचित क्षेत्र और 977 अनुसूचित क्षेत्र के अभ्यर्थियों के दस्तावेजों का सत्यापन किया गया. 23 दिसंबर 2019 से लेकर 11 फरवरी 2020 तक दस्तावेज सत्यापन हुआ. 14 फरवरी 2020 को फाइनल रिजल्ट जारी किया गया. घोटाले का क्लाइमेक्स यही था. इस रिजल्ट में यह बताया ही नहीं गया कि कुल कितनी सीटों पर भर्ती हुई है. इसमें विभागवार सफल अभ्यर्थियों और एमबीसी के पदों की जानकारी भी नहीं थी. राजस्थान अधीनस्थ सेवा चयन बोर्ड की ओर से 14 फरवरी को ही जारी प्रेस नोट पर नजर डालिए. इसकी हैडलाइन है-लिपिक ग्रेड द्वितीय के 11 हजार 322 पदों के िलए चयन सूची जारी. छह मोर्च को द्वितीय चयन सूची में 313 अभ्यर्थिों के रोल नंबर और जारी किए गए. अब सवाल यह है कि 1271 पद कहां गए. क्योंकि-चयन सूची में सिर्फ रोल नंबर जारी किए गए. वर्गवार डिटेल नहीं दी गई. 17 मार्च 2020 को एक अभ्यर्थी को आरटीआई में जो वर्गवार पदों की संख्या बताई गई, उसने आरक्षण घोटाले पर मुहर लगा दी. इसे समझने के लिए प्रशासनिक सुधार विभाग के 15 मार्च 2018 का पत्र देखना होगा. प्रशासनिक सुधार विभाग के पत्र में ओबीसी वर्ग के कुल पद 2093 बताए गए थे. जबकि आरटीआई में इनकी संख्या 1866 दिखाई गई है. सवाल है-227 पद कहां गए? जबकि प्रशासनिक सुधार विभाग के पत्र में सामान्य वर्ग के 5303 पद दिखाए गए हैं, जबकि आरटीआई में इनकी संख्या 4943 ही है. अब सवाल-सामान्य वर्ग के 360 पद कहां गए? इसका सीधा मतलब एक लाइन में समझिए-ओबीसी को 21 के बजाए 17 फीसदी और सामान्य वर्ग के अभ्यर्थियां को 50 के बजाए 46 फीसदी आरक्षण ही दिया गया. ऐसा क्यों किया गया-अधीनस्थ सेवा चयन चुप है? 587 पदों का सीधा-सीधा घोटाला कर दिया गया?
यह विधायक क्यों मुख्यमंत्री से जाकर पूछते, हमारे पत्रों पर जांच क्यों नहीं कराई?
नवलगढ़ विधायक डॉ. राजकुमार शर्मा, मंडावा विधायक रीटा चौधरी, डेगाना विधायक विजयपाल मिर्धा, सादुलपुर विधायक कृष्णा पूनिया, खींवसर विधायक नारायण बेनीवाल, परबतसर विधायक रामनिवास गावड़िया, डीडवाना विधायक चेतन डूडी, लाडनूं विधायक मुकेश भाकर, बूंदी विधायक अशोक डोगरा, भादरा विधायक बलवान पूनिया, तिजारा विधायक संदीप यादव, शाहपुरा विधायक मनीष यादव, भोपालगढ़ विधायक पुखराज गर्ग, किशनगढ़ बास विधायक दीपचंद खैरिया, सूरजगढ़ विधायक सुभाष पूनिया, पीलिबंगा विधायक धर्मेंद्र कुमार, सरदारशहर विधायक भंवरलाल शर्मा आदि मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर अभ्यर्थियों को न्याय देने की मांग कर चुके हैं. इन विधायकों और मंत्रियों को इसमें कहां दिक्कत है कि वे एक बार मुख्यमंत्री के पास संयुक्त रूप से जाए और कहे कि 587 पदों के घोटाले की जांच क्यों नहीं कराई जा रही. युवाओं को भी इन विधायकों पर दबाव बनाना चाहिए. हालांकि वे ऐसा कर रहे हैं, लेकिन हर कोई सिर्फ एक चिट्‌ठी लिखकर उसे ट्वीट करके ही काम चलाना चाहता है.

मुख्यमंत्री अशोक गहलोत जी, मैं आपसे मांग करता हूं कि आप बेरोजगार युवाओं का दर्द समझिए. इन्होंने आपको चुना है. एक अभिभावक की तरह इनकी परेशानी को समझिए और 587 पदों की कटौती मामले की जांच कराइए. 

अगली सीरिज बुधवार को. अन्य किसी भर्ती में गड़बड़ी की जानकारी आप हमें sarviind@gmail.com पर भेज सकते हैं.

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3 Comments

Unknown said…
Thank you sir aapne hamara dard samjha ...sir hum vidhayak mantriyon k pas jaker kaker thak gaye h ab sir media ka hi sahara h...
Anonymous said…
Sir rsmssb chatrawas adhikshak bharti 2016 ki waiting list 26 step 2016 ko aayi thi per abhi tak d.v nahi huaa h sir pleas aap chatrawas adhikshak bharti 2016 ke student ki bhi help kare