एसएससी और केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह छात्रों की बातों को क्यों नहीं सुन रही?

मैं बेरोजगार हूं सरकार-सीरिज-13
राजस्थान में अब बेरोजगारी की बात नहीं हो रही. क्योंकि-यहां लड़ाई अब कुर्सी को लेकर है. फिलहाल राजस्थान के युवा इस तमाशे का आनंद लेते रहे. यह भी देखते रहे कि राजनेता एक कुर्सी के लिए कितने नीचे गिर सकते हैं. परिवार को खुश करने के लिए कुछ लोग किसी भी हद तक जा सकते हैं. कुछ लोगों को वफादारी का फायदा मिल रहा है तो कुछ बगावत के सुर में कुर्सी गवा रहे हैं.
अब बात एसएससी में यूएफएम और पेंडिंग रिजल्ट की. छात्रों ने मंगलवार को फिर ट्वीटर पर कैंपेन चलाया. सरकार और एसएससी को कोसते रहे. छात्र कितना भी चिल्ला लें. कितना भी बुरा-भला कहें. अब अफसरों और नेताओं को कोई फर्क नहीं पड़ रहा. छात्रों ने #Revoke_Modified_UFM हैशटैग के जरिए अपनी बात रखी. उन्होंने लिखा-एसएससी उनका जीवन बर्बाद कर रहा है. छात्र इसलिए भी दुखी है, क्योंकि-कमेटी की रिपोर्ट लगातार टल रही है. लंबे समय तक कमेटी बनी नहीं और जब बनी तो उसकी रिपोर्ट नहीं आ रही. केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह युवाओं की बात क्यों नहीं सुन रहे. यह भी गंभीर सवाल है. छात्र उनसे पूछ रहे हैं कि उनके बच्चे होते तो क्या वे ऐसा ही रुख रखते.

गुस्सा क्यों एसएससी की सीएचएसएल परीक्षा में 4500 छात्रों को यूएफएम देकर फेल कर दिया गया. दैनिक भास्कर में मेरी लगातार खबरों के बाद एसएससी ने एक कमेटी बनाने की घोषणा की. इस कमेटी की रिपोर्ट 30 जून तक आनी थी, लेकिन एसएससी ने अब कहा है कि कोरोना वायरस की वजह से इसमें देरी हो रही है. कमेटी में कौन-कौन हैं, इसे लेकर भी जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है. इसलिए छात्रों में चिंता है.

रिजल्ट... सीजीएल 2018 टियर-3 और एमटीएस-2019 पेपर 2 का रिजल्ट भी घोषित नहीं किया गया है. जूनियर इंजीनियर के परिणाम का भी पता नहीं है.

एसएससी क्या धोखा कर रही है... सवाल यह है कि एसएससी छात्रों को तवज्जों क्यों नहीं दे रही. इसे अासानी से समझ सकते हैं. एसएससी को लगता है कि अगर छात्रों के दबाव में झुके तो हर बार उनकी बात माननी होगी. कोरोना वायरस की वजह से अभी छात्र सड़कों पर प्रदर्शन भी नहीं कर पा रहे. इसका फायदा भी एसएससी उठा रही है. ट्वीटर कैंपेन को एसएससी और सरकार ज्यादा गंभीरता से नहीं ले रही.

छात्रों का तर्क एसएससी ने परीक्षा के नोटिफिकेशन में वास्तविक व काल्पनिक शब्द का प्रयोग नहीं किया था. एसएससी ने उत्तर पुस्तिका पर इस शब्द का जिक्र किया. यह कैट के आदेश का भी उल्लंघन है. जबकि साल 2017 की परीक्षा में काल्पिनक नाम व पता लिखने पर किसी को शून्य अंक देकर फेल नहीं किया गया था.

विरोध का आधार क्या छात्रों का कहना है कि एसएससी की परीक्षा की तैयारी के लिए एनसीईआरटी की बुक्स रिकमंड की जाती है. एनसीईआरटी और सीबीएसई की पुस्तकों में पत्र लेखन के नियम में साफ बताया गया है कि सेंडर और रिसीवर का पता तो लिखना ही होता है. एसएससी ने नोटिफिकेशन में वास्तविक नाम व पता लिखने से इनकार किया था. जिन छात्रों को शून्य अंक देकर फेल किया गया है, उन्होंने वास्तविक नाम व पता नहीं लिखे हैं. इसके बाद भी उन्हें फेल करना अनुचित है. छात्रों का कहना है कि काल्पनिक पता लिखने से किसी की पहचना उजागर नहीं होती, ऐसे में इसे यूएफएम में कैसे आंका जा सकता है.

आप भी अपनी एग्जाम से जुड़ी जानकारी sarviind@gmail.com पर भेज सकते हैं. अगली सीरिज रविवार को.

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1 Comments

Anonymous said…
Sir please chatrawas adhikshak bharti 2016 ke student ki bhi aavaj uthaye waiting list Ka result aaye 10 month ho chuke h per abhi take d.v nahi huaa h aur samajik nayay adhikarita vibhag nahi bharti nikalne ki bat kar raha h aur waiting walo ko joining ke liye mana kar raha h sir aap help kare