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Monday, December 21, 2009

अब बापू पर अश्लीलता की गोलियां

रणधीर सिंह
जयपुर
. कमाई के लालच में अंधे हुए लोगों का अब निशाना गांधी बने हैं। अश्लीलता भरी चीजें परोस रातोंरात बेशुमार पैसा कमाने की कुत्सित चाह रखने वालों ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को भी नहीं बक्शा और उन पर अश्लीलता भरी शर्मनाक किताब रच डाली। और अब वह किताब शहर में मजे से बिक रही है। रंगीला गांधी नाम से बिक रही पुस्तक में जिस हद तक अश्लील वर्णन किए गए हैं, उसे देख तो कोई भी शर्मसार हो जाए। यह अश्लील किताब जयपुर में धड़ल्ले से बिक रही है। यहीं नहीं किताब इतनी पापूलर हो रही है कि लोग इसकी फोटो कॉपी करवाकर भी पढ़ रहे हैं। राजस्थान विश्वविद्यालय में भी ये पुस्तक छात्रों के बीच चर्चित हो रही है।

शर्मशार कर देने वाले शब्दों का पुंज

महात्मा गांधी के बारे में ऐसे शब्दों का प्रयोग किया गया है जो पढऩे वाला भी शर्मशार हो जाए। गांधी के बारे में बताया कि वो कैसे लड़कियों को ब्रह्मचर्य का प्रयोग करना सिखाते थे। उसमें दिया हुआ है कि उनकी शेतानियत का भांडा फोड़ उनके ही निजी सचिव निर्मल कुमार बोस ने किया। इस पुस्तक में उस समय की प्रसिद्ध महिलाओं के कुछ अन्य पुस्तकों के हवाले से लिखा गया है तथा महात्मा गांधी के साथ उनके संबंधों के बारे में बताया गया है।

बापू नगर में बापू के नाम
रंगीला गांधी नाम की जो किताब शहर में बेची जा रही है। किताबों के आवरण पृष्ठ पर गांधीजी की फोटो दी गई है, जो अपनी दो शिष्याओं के कंधे पर हाथ रखे दिखाए गए हैं। ये किताब बापू नगर में भी बिक रही है।

कहां से प्रकाशित
किताब पर प्रकाशक का नाम भीम पत्रिका पब्लिकेशंज जालंधर दिया गया है। जिस पर जयपुर में चंद्रवाल साहित्य बुक सेंटर बी 75 नीति मार्ग बजाज नगर नामक बुक सेंटर की मुहर लगी हुई है।

पुस्तक के आवरण पर
रंगीला गांधी नाम पुस्तक के मुख प्रष्ट पर मूल लेखक के नाम के रूप में एल.आर.बाली का नाम दिया हुआ है तथा उनके नीचे अनुवादक के रूप में सूर्यकांत शर्मा का नाम दिया हुआ है। अंतिम पेज पर श्री रतन लाल सांपला संस्थापक बुद्ध ट्रस्ट सोफी पिंड जिला जालंधर पंजाब लिखा हुआ है उसके नीचे लिखा है कि जिनकी प्रेरणा व सहायता से ये पुस्तक प्रकाशित हुई।

आंदोलन की तैयारी
छात्र नेता नरसी किराड़ ने बताया कि इस तरह की किताब की फोटोकॉपी राजस्थान विश्वविद्यालय में भी छात्रों के पास देखी गई हैं। जब महात्मा गांधी जी को राष्ट्रपिता का दर्ज है तो उनके खिलाफ अपशब्द लिखना गलत है। किताब लिखने वालों के खिलाफ आंदोलन चलाएंगे और किताब की होली जलाएंगे।

किसी भी महान पुरूष के चरित्र के साथ ऐसा खिलवाड़ कितना उचित है? हमें जरूर बताएं... sabhar: dainik bhaskar

1 comments:

Vinayak Sharma said...

mera to yeh maanna hai ki vicharo ya vhchardhara ka matbhed to ho sakta hai...aur ek shaleenta ke dayre mein rah kar virodh bhee.....parantu kisee ka bhee shaleenta ke dayre se baahar ja kar virodh ya charitra-hanan to kutsit mansikta ka prichayak hai....jisne bhee yeh kiya..uske is krut kee na kewal bhatsarna hee kee jaani chahiye..balki yadi ho sake to kanoonee karyavaahee bhee honee chahiye...
Devi-devtao va Mahapurusho ka is prakar se apmaan badh Ho......!!!!!!!